हिंदी कविता - खुद से बेहतर मैं किसी से प्रतिस्पर्धा में नहीं, किसी दौड़ में भी नहीं शामिल , नहीं चाहती बनना किसी से बेहतर, सोचती...
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अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस पर कविता - ये मजदूर......
ये मजदूर...... पर्वत की तरह मजबूत, साहसी,अटल, कर्मठ, कर्मण्य, सहनशील..... न जाने कितने घरों, भवनों अट्टालिकाओं का निर्माण किया होगा ...
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प्रकृति कहती है/श्री सोहनलाल द्विवेदी
पर्वत कहता शीश उठाकर, तुम भी ऊॅंचे बन जाओ। सागर कहता है लहराकर, मन में गहराई लाओ। समझ रहे हो क्या कहती है, उठ-उठ, गिर-गिर तरल तर...
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International Women's Day poems in hindi
शीर्षक- औरत ईश्वर की अद्वितीया कृति तुम एक नारी हो ईश्वर की अनमोल संरचना खुद में एक शक्ति हो घर आंगन को महाकाने वाली ऊषा की उजली किरण...
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शीर्षक - गुम होता बचपन
एक समय था वह बचपन का, खेला करते थे पिड्डू। कभी खेलते थे हम कंचे कभी खेलते थे अड्डू।। कभी घिसड़ते पिथोरो पर तो कभी घिसड़ते मिट्टी ...
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भारत की धूमिल होती सभ्यता और संस्कृति को पुनर्जीवित करती वर्तमान परिस्थितियाँ
संस्कारों से पोषित ,यह हमारी विश्व की महान संस्कृति है | समता ,ममता और आचार: परमो धर्म: का पाठ पढाने वाली उदारता ,मानवता, सत्य -अहिंसा पर...
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युवा दिवस कविता : राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष
किसी भी देश का भविष्य उसके युवाओं पर ही निर्भर करता है। युवा दिवस मनाने के लिए सरकार ने स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस को चुना और तब से हर...
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शीर्षक- नारी सम्मान
नारी की अस्मिता-सम्मान-संस्कार को लेकर बात करे यह संसार। घर की स्त्री इज्जत है कहना तो आसान है किसी के घर पर पत्थर ना फेंको क्या कहा किसी ...
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