Golden
Temple
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Golden Temple
गोल्डन टेम्पल
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गुरु का द्वार, गुरुदवारा, मन की शांति सुंदर दर्शन श्री हरिमंदिर साहिब, सिख धर्म को मानने वालों का प्रमुख स्थल है। यह दरबार साहिब या स्वर्ण मंदिर के नाम से जाना जाता है, यह अमृतसर में स्थित है, दरबार साहिब या स्वर्ण मंदिर, बाहर से सोने का बना हुआ है। इसकी खासियत ये है सारा शहर स्वर्ण मंदिर के चारो ओर से बसा हुआ है जो कि अमृतसर के नाम से जाना जाता है। यहाँ हर रोज हजारो श्रद्धालु भारत और भारत के बाहर से, यानि के देश विदेश से आते है। यहाँ गुरु राम दास का नाम आता है जिस ने उस सरोवर की नीव अपने हाथों से रखी थी। स्वर्ण मंदिर इसी सरोवर के बीचो बीच बना हुआ है और अमृसर का नाम यही से पड़ा। अमृतसर भारत का हिस्सा है जो कि पंजाब में पड़ता है।
गुरु अर्जुन देव ने इस गुरूद्वारे का नक्शा तैयार किया था, यह गुरुद्वारा चार दरवाजे रखता है जो चारो दिशाओ का स्वागत करते है। यहाँ हर धर्म के लोगों का स्वागत होता है। कोई भेद भाव नहीं किया जाता है। स्वर्ण मंदिर लगभग 400 साल पुराना है, यह मंदिर सफेद संगमरमर से बना हुआ है। यह बहुत सुन्दर है और बेमिसाल है, इसकी नक्काशी की जितने तारीफ की जाए उतनी कम है। इस की दीवारों पर सोने की कारीगरी की हुई है, स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करते ही मधुर गुरुवाणी कानो में रस घोलती हैं।
गुरु ईश्वर के समान पूजे जाते हैं। यहाँ रोशनी की व्यवस्था देखने लायक हैं। इस मंदिर की एक खास बात हैं यहाँ एक बेरी का पेड़ हैं जिस को तीरथ की तरह पूजा जाता हैं , जो कि बाबा बुड्ढा के नाम से विख्यात हैं, ऐसा माना जाता हैं बाबा जी यही से सारे मंदिर का काम देखा करते थे।
अब स्वर्ण मंदिर की सब से महत्वपूर्ण कथा हैं, एक बार की बात है, एक बेटी को भगवान और गुरुओ पर बहुत विश्वास था, लेकिन उस लड़की का पिता अहंकारी था, बेटी कहती थी, ईश्वर जो करता है सो अच्छा करता है। पर उसके पिता को इस पर एतराज था। तो उस ने अपनी बेटी की शादी एक कोढ़ी व्यक्ति से कर दी, फिर भी उस लड़की ने कहा ईश्वर जो करता है वो अच्छा ही करता है, शादी के बाद वह लड़की, मेहनत मजदूरी कर के अपने पति का और अपना पेट पालती थी।
एक दिन की बात है वह लड़की अपने पति के साथ स्वर्ण सरोवर के किनारे बैठी थी, वह लड़की अपने पति से बोली आज का दिन आप यहीं पर रुको, मैं काम ख़त्म कर के शाम को आप से मिलती हूँ। वह चली गयी और उस का पति वही सरोवर के किनारे बैठ गया, वह बहुत दुखी था कि अचानक से उस ने देखा कि वहाँ एक काला कौआ आया जो सरोवर के ऊपर उड़ रहा था, उसने सरोवर में डुबकी लगाई और हंस बन कर उड़ गया, थोड़ी देर में दूसरा कौआ आया उस के साथ भी वही हुआ, उस ने सोचा परमात्मा मुझे इशारा कर रहा है कि मैं भी इस सरोवर में डुबकी लगा लूँ। वह बड़ी मुश्किल से सरोवर के पास पहुँचा ओर बेर का पेड़ की टहनी पकड़ कर उस सरोवर में डुबकी लगाई और बाहर निकल आया चमत्कार हो गया, वह कोढ़ी ठीक हो गया, तभी उस की पत्नी वहाँ पर आई और अपने पति को खोजने लगी, मगर उस का पति ठीक हो गया था, लेकिन उस का एक हाथ जो बाहर था वह अभी भी वैसा ही था, उसने अपनी पत्नी को सारी बात बता दी, फिर उस आदमी ने अपने दूसरे हाथ को सरोवर में डाला तो वह भी ठीक हो गया।
अंत में दो बातें कहनी है, यहां पर लंगर की व्यवस्था है जो श्रद्धालुओ के लिए 24
घंटे 365 दिन खाने की व्यवस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की ओर से किया जाता है। यहां यात्रियों के ठहरने की भी व्यवस्था है।
यह सन 1784 में व्यवस्थित किया गया था।
स्वर्ण मंदिर अकाल तख्त, इसको दरवार साहिब का स्थान भी माना जाता है। यह संगमरमर का खूबसूरत शहर लगता है।
स्वर्ण मंदिर हम रोड और रेल दोनों से पहुंच सकते हैं।
Very nice 👍
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